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Bihar: चुनाव के तुरंत बाद बिहार में गरीबों पर सरकार का बुल्डोजर, चुनाव से पहले क्यों नहीं? Samrat Chaudhary

Bihar: चुनाव के तुरंत बाद बिहार में गरीबों पर सरकार का बुल्डोजर, चुनाव से पहले क्यों नहीं? Samrat Chaudhary

बिहार विधानसभा चुनाव के खत्म होते ही राज्यभर में अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज़ हो गया है। पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर समेत कई जिलों में बुलडोज़र चल रहे हैं और प्रशासन अवैध निर्माणों पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। कई घर, दुकानें और अस्थायी ठिकाने तोड़े जा रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यह कार्रवाई चुनाव से पहले क्यों नहीं हुई? यदि अतिक्रमण वर्षों से समस्या था, तो चुनाव के दौरान प्रशासन इतना सक्रिय क्यों नहीं दिखा? क्या वोट कटने का डर था? क्या सरकार चुनाव परिणाम आने तक जनता की नाराज़गी से बचना चाहती थी?

इसी बीच, बिहार के नए गृह मंत्री सम्राट चौधरी इस कार्रवाई का चेहरा बनकर उभरे हैं। जिस तेजी और सख़्ती से वे एक्शन ले रहे हैं, उसने विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सम्राट चौधरी “बुल्डोज़र राजनीति” को बढ़ावा दे रहे हैं और चुनाव के बाद दिखावटी एक्शन लेकर जनता का ध्यान असल मुद्दों से हटाने की कोशिश कर रहे हैं।

दूसरी ओर, बीजेपी समर्थक सम्राट चौधरी को “बुल्डोज़र वाले सम्राट चौधरी” कहना शुरू कर चुके हैं और उनकी तुलना यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कर रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि बिहार में भी अब कानून व्यवस्था को लेकर ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है।

लेकिन इस बीच सबसे ज्यादा मार झेल रहा है गरीब और लाचार वर्ग। जिनके सिर से अचानक छत छिन रही है, दुकान उजड़ रही है, रोज़गार खत्म हो रहा है—उनके सवालों का जवाब देने कोई सामने नहीं आ रहा। कई परिवार बिना वैकल्पिक व्यवस्था के सड़क पर आ गए हैं।

अतिक्रमण हटाना जरूरी है, लेकिन चुनाव बाद अचानक एक्शन और राजनीतिक रंग ने इस पूरे अभियान की नीयत पर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या यह कानून का पालन है या चुनावी रणनीति का असर?

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